
सद्गुरु की कृपा से ही आत्मज्ञान और परम सत्य की होती है प्राप्ति, गुरु जीवन के सर्वोच्च मार्गदर्शक : पंडित साकेत मिश्र
बैलिस्टर तिवारी | लोकायुक्त न्यूज
कुशीनगर। आषाढ़ मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा भारतीय सनातन संस्कृति का एक पावन एवं महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की स्मृति को समर्पित होने के कारण व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व गुरु-भक्ति, ज्ञान, श्रद्धा और आत्मबोध की सनातन परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

डिघवा बुजुर्ग, कसया निवासी पंडित साकेत मिश्र ‘आगमानंदनाथ’ ने कहा कि सनातन धर्म में गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मज्ञान का प्रकाश देने वाले दिव्य मार्गदर्शक हैं। उपनिषदों के अनुसार “गु” का अर्थ अंधकार तथा “रु” का अर्थ उस अंधकार का नाश करने वाला है। जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त करे, वही सच्चा गुरु है।उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत में जड़भरत द्वारा राजा राहूगण को दिए गए उपदेश में स्पष्ट किया गया है कि तप, यज्ञ, त्याग अथवा केवल शास्त्रों के अध्ययन से आत्मज्ञान की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि सद्गुरु की कृपा से ही परम सत्य का बोध संभव है।पंडित मिश्र ने स्कंद पुराण की गुरु गीता के प्रसिद्ध श्लोक “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः…” तथा संत कबीरदास के दोहे “गुरु गोविंद दोउ खड़े…” का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु ही जीव और परमात्मा के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भी ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के लिए सद्गुरु के मार्गदर्शन को अनिवार्य बताया है।उन्होंने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं से अपने दीक्षा गुरु एवं आचार्य का श्रद्धापूर्वक पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि जिनके जीवन में सद्गुरु नहीं हैं, वे भगवान दक्षिणामूर्ति शिव अथवा आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का गुरु स्वरूप में पूजन कर सद्गुरु की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। यही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश तथा सनातन संस्कृति की शाश्वत परंपरा है। विकल्प:गुरु ही आत्मज्ञान का सच्चा मार्गदर्शक : पंडित साकेत मिश्रगुरु पूर्णिमा पर सद्गुरु के प्रति श्रद्धा ही सनातन संस्कृति का मूल संदेशगुरु की कृपा से ही मिलता है आत्मबोध और परम सत्य : पंडित साकेत मिश्र
