
लोकायुक्त न्यूज़
नई दिल्ली/गोरखपुर। भारतीय रेल ने हरित परिवहन और ऊर्जा दक्षता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में सोलर-असिस्टेड यात्री कोच विकसित किया है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य पारंपरिक विद्युत उत्पादन पर निर्भरता कम करना, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना और यात्रियों को अधिक विश्वसनीय ऑनबोर्ड विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराना है।
अब तक आईसीएफ यात्री कोचों में बिजली का उत्पादन एक्सल-चालित अल्टरनेटर के माध्यम से होता था, जो ट्रेन की गति से संचालित होकर बैटरी बैंक को चार्ज करता है। इसी बिजली से कोच में प्रकाश व्यवस्था, पंखे और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं संचालित होती हैं। हालांकि यह प्रणाली वर्षों से प्रभावी रही है, लेकिन इसमें ट्रेन की गति पर निर्भरता और ऊर्जा हानि जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।
नई सोलर-असिस्टेड तकनीक के तहत कोच की छत पर लगभग 7 किलोवाट-पीक (kWp) क्षमता का उच्च दक्षता वाला रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है। यह सौर ऊर्जा से सीधे बिजली उत्पन्न कर बैटरी बैंक को चार्ज करेगा, जिससे पारंपरिक चार्जिंग प्रणाली पर भार कम होगा और ऊर्जा का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। इससे ऑनबोर्ड विद्युत सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
भारतीय रेल के अनुसार, पायलट परियोजना के रूप में एक आईसीएफ नॉन-एसी कोच में लगाए गए इस सोलर सिस्टम से प्रति वर्ष लगभग 13,400 यूनिट (kWh) स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा। इससे प्रति कोच हर साल लगभग ₹2.80 लाख की बचत होने के साथ करीब 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
रेलवे का कहना है कि पायलट परियोजना के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बाद इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से अन्य कोचों में भी लागू किया जाएगा। यह पहल भारतीय रेल की हरित ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करती है तथा भविष्य में ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल रेलवे संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
