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फागुन की फुहार में डूबा कवि सम्मेलन: “के ही मारेला भरि पिचकारी” से गूंजा सभागार!

लोकायुक्त NEWS
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में विमर्श साहित्यिक सामाजिक सेवा संस्था द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी एवं होली मिलन समारोह में बसंती रंगों की बौछार हुई। तहसील क्षेत्र के साखोपार स्थित नवल किशोर सिंह स्मृति संस्थान सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।

कवियों ने फाग और सामाजिक सरोकारों से सराबोर रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मोहन पांडेय भ्रमर की “के ही मारेला भरि पिचकारी, भींजत मोर सारी” पर श्रोता झूम उठे। डॉ. ओम प्रकाश द्विवेदी ‘ओम’ की “सखी री, बसंत आगमन स्वागत को उत्सुक मेरी अंखियां” को खूब सराहना मिली। आकाश महेशपुरी की व्यंग्य रचना “नेता नोटों की गड्डी से खेल रहे हैं” ने समसामयिक राजनीति पर तीखा कटाक्ष किया।

डॉ. जयति ओझा ने “चलो मिलकर कहानी लिखते हैं” सुनाकर साहित्यिक एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने साहित्य सृजन को समाज की दिशा तय करने वाला बताया।

संस्था अध्यक्ष आरके भट्ट सहित पदाधिकारियों ने अतिथियों और कवियों को सम्मानित किया। फाग गीतों, सरा-रा-रा की गूंज और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कार्यक्रम यादगार बन गया।

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