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कुशीनगर में बेटियों का दबदबा: एक ही स्कूल की दो छात्राओं ने हाईस्कूल-इंटर में किया जिला टॉप, प्रदेश में भी टॉप-6 में बनाई जगह

साजिद अंसारी/लोकायुक्त न्यूज

कुशीनगर में इस वर्ष यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कराई है। शिक्षा के क्षेत्र में यह साल खास तौर पर बेटियों के नाम रहा, जहां हाईस्कूल और इंटरमीडिएट—दोनों कक्षाओं की जिला टॉपर छात्राएं एक ही विद्यालय से निकलीं। यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गौरव का विषय है, बल्कि समाज में बेटियों की शिक्षा को लेकर एक मजबूत और सकारात्मक संदेश भी दे रही है। दुदही विकासखंड के कोकिलपट्टी स्थित राधाकृष्ण मेमोरियल इंटर कॉलेज इस समय पूरे जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसी विद्यालय की दो मेधावी छात्राओं—रोशनी गुप्ता (हाईस्कूल टॉपर) और आरुषि गुप्ता (इंटरमीडिएट टॉपर)—ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल विद्यालय का नाम रोशन किया, बल्कि यह साबित कर दिया कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं।


हाईस्कूल में रोशनी गुप्ता ने रचा कीर्तिमान


जिले के दुदही क्षेत्र के कोकिलपट्टी गांव की निवासी रोशनी गुप्ता ने हाईस्कूल परीक्षा में 600 में से 581 अंक (96.83 प्रतिशत) प्राप्त कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश स्तर पर छठा स्थान प्राप्त कर कुशीनगर को गौरवान्वित किया है। रोशनी के पिता राजेश गुप्ता गांव में होम्योपैथी क्लिनिक संचालित करते हैं, जबकि माता पुनिता देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद रोशनी ने अनुशासित दिनचर्या, निरंतर अभ्यास और मजबूत संकल्प के बल पर यह मुकाम हासिल किया। रोशनी ने बताया कि वह प्रतिदिन लगभग पांच से छह घंटे पढ़ाई करती थीं और पढ़ाई के दौरान मोबाइल व सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखती थीं। उनका मानना है कि एकाग्रता और समय का सही प्रबंधन ही सफलता की कुंजी है। उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को देखते हुए वह भविष्य में इस क्षेत्र में योगदान देना चाहती हैं।


इंटरमीडिएट में आरुषि गुप्ता बनीं जिला टॉपर


इसी विद्यालय की छात्रा आरुषि गुप्ता जो बैकुंठपुर कोठी गांव की निवासी हैं ने इंटरमीडिएट परीक्षा में 500 में से 465 अंक (93.00 प्रतिशत) प्राप्त कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया। आरुषि के पिता रमेश गुप्ता आटा चक्की संचालित करते हैं और माता सीता देवी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने भी सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और निरंतर अध्ययन के बल पर यह सफलता अर्जित की है। आरुषि इससे पहले भी हाईस्कूल परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले में दूसरा और प्रदेश में नौवां स्थान हासिल कर चुकी हैं। उनकी यह निरंतर सफलता उनकी प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है। आरुषि ने बताया कि उन्होंने नियमित पढ़ाई के साथ-साथ समय-समय पर स्वयं का मूल्यांकन किया, जिससे कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दे सकीं। उनका लक्ष्य भी डॉक्टर बनकर समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है।


एक ही स्कूल से दो टॉपर: बनी मिसाल


राधाकृष्ण मेमोरियल इंटर कॉलेज की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एक ही विद्यालय से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों के जिला टॉपर निकलना बेहद दुर्लभ है। यह विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों की मेहनत और अनुशासित वातावरण को दर्शाता है। विद्यालय के शिक्षक लगातार छात्रों को न केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराते हैं, बल्कि उन्हें लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करते हैं।


बेटियों ने बदली समाज की सोच


इस पूरे परिणाम की सबसे अहम बात यह है कि दोनों टॉपर छात्राएं हैं। जहां आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों की शिक्षा को लेकर संकोच देखा जाता है, वहीं रोशनी और आरुषि ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
उनकी यह उपलब्धि उन परिवारों के लिए एक प्रेरणा है, जो अब भी बेटियों को उच्च शिक्षा देने में हिचकिचाते हैं। यह सफलता एक स्पष्ट संदेश देती है कि अगर बेटियों को समान अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।


ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों का बढ़ता दबदबा


इस वर्ष के परीक्षा परिणामों में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों का दबदबा साफ देखने को मिला है। सीमित संसाधनों के बावजूद गांवों के छात्र-छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन कर यह साबित किया है कि सफलता के लिए केवल मेहनत और लगन जरूरी है।
हाईस्कूल टॉप-10 में शुभम गुप्ता (575 अंक) दूसरे और समीर अंसारी (571 अंक) तीसरे स्थान पर रहे। वहीं इंटरमीडिएट की टॉप सूची में भी कई छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का मान बढ़ाया।


विद्यालय प्रबंधक का बयान


राधाकृष्ण मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक रमेश चन्द्र कुशवाहा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा,यह हमारे विद्यालय के लिए गर्व का क्षण है कि हमारी दो बेटियों ने जिले में शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह सफलता छात्रों की मेहनत, शिक्षकों की लगन और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। हम हमेशा से बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देते आए हैं और आगे भी उन्हें हर संभव संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे। हमारा लक्ष्य है कि हमारे विद्यालय से पढ़कर निकलने वाले छात्र-छात्राएं देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे छात्र जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो सकें।


अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका रही अहम


दोनों छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय के सकारात्मक वातावरण को दिया। अभिभावकों ने भी बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और हर संभव सहयोग प्रदान किया। विद्यालय के शिक्षकों ने समय-समय पर छात्रों का मार्गदर्शन कर उनकी कमजोरियों को दूर करने में मदद की, जिससे वे बेहतर प्रदर्शन कर सके।

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