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कुशीनगर में रिटायर्ड होमगार्ड इंस्पेक्टर का बेटा पहले ही प्रयास में बना नायब तहसीलदार,IAS बनने का है सपना

साजिद अंसारी/लोकायुक्त न्यूज

कुशीनगर। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो सफलता जरूर कदम चूमती है। इस कहावत को चरितार्थ किया है कुशीनगर जनपद के ग्राम बेलही शुक्ल निवासी आयुष कुमार शुक्ल ने, जिन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर नायब तहसीलदार पद प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। आयुष कुमार शुक्ल, अशोक कुमार शुक्ल के पुत्र हैं, जो होमगार्ड इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पड़रौना में “मां लक्ष्मी किराना स्टोर” नाम से दुकान शुरू कर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उनकी माता गीता शुक्ला एक गृहिणी हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी और हर परिस्थिति में उसका मनोबल बढ़ाया। आयुष का मूल निवास ग्राम बेलही शुक्ल, पोस्ट होरलापुर, कुशीनगर है, जबकि वर्तमान में उनका परिवार पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, वार्ड नंबर-3, वावली-बलुचहां मार्ग, पड़रौना में निवास करता है। शैक्षिक सफर भी उनकी मेहनत और लगन की मिसाल है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आदर्श पूर्व माध्यमिक विद्यालय हरलापुर से प्राप्त की। इसके बाद सेंट थेरेसेस संस्थान से वर्ष 2009 में हाईस्कूल तथा जनकराज इंटर कॉलेज मठिया प्रसिद्ध तिवारी से वर्ष 2011 में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया। उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली जाकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 2014 में बीएससी ऑनर्स और वर्ष 2016 में परास्नातक की डिग्री हासिल की। दिल्ली में रहकर उन्होंने आकाश कोचिंग सेंटर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और यूपीएससी सहित अन्य परीक्षाओं के लिए निरंतर प्रयास करते रहे। वर्षों की कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम यह रहा कि उन्होंने यूपीपीसीएस में पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली। तैयारी के दौरान आयुष ने केवल अपने लक्ष्य तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई। जब भी उन्हें समय मिलता, वे गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों को आईआईटी/जेईई की निशुल्क तैयारी करवाते थे। परिवार के अनुसार, तैयारी के दौरान आयुष ने कई त्याग किए। वे त्योहारों और पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो पाते थे, जिस कारण कई लोगों के ताने भी सुनने पड़े। उनकी माता गीता शुक्ला ने बताया कि इस दौरान ऐसा बहुत कम अवसर आया जब पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा हो पाया, केवल एक शादी का ही मौका था जब सभी सदस्य एक साथ मौजूद थे। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा बेटे का हौसला बढ़ाया और उसे लक्ष्य पर केंद्रित रहने की प्रेरणा दी। इसी बीच, सफलता की जानकारी मिलते ही उनके विद्यालय की स्पोर्ट्स अध्यापिका शशिकला श्रीवास्तव उनके घर पहुंचीं और परिजनों का मुंह मीठा कराकर खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि एक गुरु के लिए इससे बड़ी खुशी कोई नहीं होती कि उसका छात्र इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करे। आयुष की इस सफलता पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उनके आवास पर पहुंचकर बधाई देने वालों में हिमांशु राय (अधिवक्ता), शालवी श्रीवास्तव,सुधीर पाण्डेय, पप्पू यादव, महेंद्र चौहान, अनिल मणि त्रिपाठी, आतिश राय, विवेकानंद मिश्र (अधिवक्ता), राजीव शुक्ला (अधिवक्ता), ओम प्रकाश दुबे (अधिवक्ता), केशर त्रिपाठी, सुभाष शुक्ला, डॉ. संतोष कुमार शुक्ला, आशुतोष शुक्ला, प्रवीण शुक्ला, शिव कुमार शुक्ला, ओम प्रकाश शुक्ला, विपिन तिवारी, रेणु त्रिपाठी (शिक्षक), डॉ. आर. पी. सिंह तथा ज्ञानेश्वर कुशवाहा (अधिवक्ता) सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। इस मौके पर आयुष के पिता अशोक कुमार शुक्ल ने बताया कि उनका बेटा आगे आईएएस बनने का लक्ष्य रखता है और वह अपनी तैयारी लगातार जारी रखेगा। परिवार को उम्मीद है कि वह भविष्य में और बड़ी सफलता हासिल करेगा।

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