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नगर पालिका पडरौना में बढ़ा विवाद, 21 सभासदों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी !धारा 86(2) के तहत बैठक न बुलाने का आरोप; शासन व जिला प्रशासन के आदेशों की अवहेलना का मामला गरमाया

लोकायुक्त NEWS
पडरौना (कुशीनगर)। नगर पालिका परिषद पडरौना में अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) के खिलाफ 21 निर्वाचित सभासदों ने मोर्चा खोल दिया है। सभासदों ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 86(2) के तहत अधियाचन बैठक बुलाने के लिए कई बार अनुरोध करने और शासन-प्रशासन द्वारा निर्देश जारी किए जाने के बावजूद अब तक बैठक नहीं बुलाई गई, जिससे नगर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सभासदों द्वारा जारी नोटिस दिनांक 10 फरवरी 2026 के अनुसार, 11 सितंबर 2025 को अध्यक्ष/ईओ को लिखित रूप से अधियाचन बैठक बुलाने का अनुरोध किया गया था। इस बैठक में वार्डों में विकास कार्यों की समीक्षा, समितियों के गठन तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की गई थी। सभासदों का आरोप है कि उक्त अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मामले को लेकर सभासदों ने जिला प्रशासन एवं विभागीय उच्चाधिकारियों को भी कई बार लिखित शिकायत भेजी। दस्तावेजों के अनुसार, शासन ने 10 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी कुशीनगर को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुपालन में जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने 27 नवंबर 2025 को उपजिलाधिकारी पडरौना को पर्यवेक्षक नियुक्त करते हुए बोर्ड बैठक की कार्यवाही पूर्ण कराने के निर्देश जारी किए, लेकिन बैठक आयोजित नहीं की गई।
इसके बाद शासन ने 19 जनवरी 2026 को पुनः जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि धारा 86(1) के तहत सभासदों के अधियाचन पत्र में उल्लिखित बिंदुओं पर एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर शासन को अवगत कराया जाए। 23 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी ने अध्यक्ष/ईओ को तीन दिन के भीतर कार्रवाई कर सूचना देने का निर्देश दिया, लेकिन सभासदों का कहना है कि अब तक बैठक बुलाने के लिए कोई एजेंडा जारी नहीं किया गया।
सभासदों ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 86(2) में 15 दिनों के भीतर अधियाचन बैठक बुलाने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके बावजूद आदेशों की अवहेलना की जा रही है।
21 सभासदों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 फरवरी 2026 तक शासन और जिला प्रशासन के आदेशों का पालन नहीं कराया गया तो वे 25 फरवरी 2026 से आमरण अनशन पर बैठने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली समस्त जिम्मेदारी नगर पालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी तथा जिला प्रशासन की होगी।
नगर पालिका परिषद पडरौना में बढ़ता यह विवाद स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें शासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि विवाद का समाधान कैसे और कब तक निकलता है।

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