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लोकसभा में अहम कदम: शिक्षा और कानून सुधार से जुड़े दो बिलों पर चर्चा के लिए बढ़ा समय

लोकायुक्त न्यूज़

लोकसभा ने गुरुवार (12 फरवरी 2026) को दो महत्वपूर्ण विधेयकों की जांच कर रही संसदीय समितियों का कार्यकाल बढ़ाने को मंजूरी दे दी। सदन में पेश किए गए प्रस्तावों को ध्वनिमत से पारित किया गया। सरकार का कहना है कि इन विधेयकों पर व्यापक चर्चा, विशेषज्ञों से परामर्श और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए समितियों को अतिरिक्त समय दिया जा रहा है।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक, 2025 क्या है?

यह प्रस्तावित कानून उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की रूपरेखा पेश करता है। इसके तहत एक एकल नियामक संस्था (Single Regulator) गठित करने की योजना है, जो वर्तमान में काम कर रहे कई नियामक निकायों की जगह ले सकती है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

इस विधेयक की समीक्षा के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित है। समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद डॉ. डी. पुरंदेश्वरी कर रही हैं। अब इस समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह की शुरुआत तक का समय दिया गया है। यह विधेयक शीतकालीन सत्र 2025 के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था।

जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2025

यह विधेयक 42 अलग-अलग कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसके तहत लगभग 288 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का लक्ष्य है।
सरकार का तर्क है कि छोटे-मोटे तकनीकी या प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए जेल की सजा की बजाय सरल जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। इससे कारोबारी माहौल बेहतर होगा, नियामकीय बोझ कम होगा,‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा
और भरोसे पर आधारित शासन प्रणाली मजबूत होगी।

इस बिल की जांच के लिए गठित प्रवर समिति (Select Committee) की अध्यक्षता भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या कर रहे हैं। समिति का कार्यकाल अब 13 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह विधेयक पिछले वर्ष कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में पेश किया गया था।

सदन में कैसे पारित हुए प्रस्ताव?

VBSA विधेयक से जुड़े प्रस्ताव को डॉ. डी. पुरंदेश्वरी ने रखा। जन विश्वास विधेयक के प्रस्ताव को भाजपा सांसद मालविका देवी ने सदन के समक्ष पेश किया।
दोनों प्रस्तावों को लोकसभा ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

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