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Economic Survey 2025-26: 8 वर्षों में योगी सरकार के कार्यकाल में यूपी की अर्थव्यवस्था दोगुने से भी आगे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विधानमंडल के बजट सत्र में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, बीते आठ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016-17 में 13.30 लाख करोड़ रुपये की रही अर्थव्यवस्था वर्ष 2024-25 में बढ़कर 30.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जबकि वर्ष 2025-26 में इसके 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया गया है। 

वित्त मंत्री ने की रिपोर्ट पेश  
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह वृद्धि उत्तर प्रदेश को देश की प्रमुख राज्य अर्थव्यवस्थाओं में सशक्त स्थान दिलाती है। समीक्षा में निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का विस्तृत विवरण दिया गया है।   

50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी वर्ष 2016-17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 9.1 प्रतिशत हो गई है। प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2016-17 के 54,564 रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1,09,844 रुपये हो गई है, जबकि वर्ष 2025-26 में इसके 1,20,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। क्षेत्रवार योगदान में वर्ष 2024-25 के दौरान कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 27.2 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की 47 प्रतिशत रही।       

बजट आकार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई
प्रदेश के बजट आकार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016-17 में 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट वर्ष 2025-26 में 8.33 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। पूंजीगत व्यय वर्ष 2016-17 के 69.79 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 147.72 हजार करोड़ रुपये हो गया है। सार्वजनिक ऋण-से-जीएसडीपी अनुपात 29.3 प्रतिशत से घटकर 28 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि राज्य का अपना कर राजस्व 0.86 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.09 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।       

समीक्षा में प्रस्तुत आंकड़े तेज आर्थिक वृद्धि का संकेत देते 
आर्थिक समीक्षा में प्रस्तुत आंकड़े प्रदेश की तेज आर्थिक वृद्धि का संकेत देते हैं। हालांकि, इन दावों का वास्तविक प्रभाव रोजगार सृजन, आय असमानता में कमी और ग्रामीण-शहरी संतुलन जैसे सामाजिक-आर्थिक सूचकों पर कितना पड़ा है, इसका आकलन जमीनी स्तर पर परिणामों से ही स्पष्ट होगा। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा। 

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