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सरकारी आवास बना क्लीनिक! कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर पर छापा, लाखों की दवाएं बरामद

डीएम को मिली गोपनीय सूचना पर एसडीएम, सीओ और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त कार्रवाई, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

साजिद अंसारी/लोकायुक्त न्यूज

कुशीनगर। महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात एक चिकित्सक के सरकारी आवास पर निजी प्रैक्टिस किए जाने की शिकायत सही पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर एसडीएम सदर, क्षेत्राधिकारी और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम ने चिकित्सक के सरकारी आवास पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान मौके पर मरीजों की मौजूदगी मिलने के साथ ही भारी मात्रा में दवाएं भी बरामद की गईं। प्राथमिक जांच में यह दवाएं लाखों रुपये मूल्य की बताई जा रही हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को लेकर जिले भर में चर्चा का माहौल है और अब लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट तथा आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को जनता दर्शन के दौरान तथा अन्य माध्यमों से शिकायतें प्राप्त हुई थीं कि मेडिकल कॉलेज में तैनात फिजिशियन डॉ. दीन मुहम्मद अपने सरकारी आवास पर मरीजों को देखकर निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पहले गोपनीय स्तर पर सत्यापन कराया गया। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक टीम गठित कर मौके पर छापेमारी की गई।बुधवार को एसडीएम सदर आयुष गुप्ता, सीओ डॉ. अजय कुमार सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर दीपक पांडेय तथा अन्य अधिकारियों की टीम मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित सरकारी आवास पर पहुंची। अधिकारियों के पहुंचते ही परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जांच के दौरान आवास पर मरीजों के आने-जाने और उपचार से संबंधित गतिविधियों के संकेत मिले। टीम ने मौके पर उपलब्ध दवाओं, चिकित्सा सामग्री तथा अन्य दस्तावेजों का गहन निरीक्षण किया। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न ब्रांड की दवाएं बरामद हुईं। अधिकारियों ने दवाओं के भंडारण, खरीद, उपयोग और वितरण से संबंधित अभिलेखों की जांच शुरू कर दी। बरामद दवाओं का सत्यापन कराने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं। देर शाम तक ड्रग विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर सूची तैयार करने और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने में जुटे रहे। सूत्रों के अनुसार संबंधित चिकित्सक के खिलाफ निजी प्रैक्टिस की शिकायतें कोई नई नहीं हैं। बताया जाता है कि पिछले कई वर्षों से इस प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं। मेडिकल कॉलेज में ओपीडी के दौरान मरीजों को देखने के बाद सरकारी आवास पर भी मरीजों का उपचार किए जाने की बातें सामने आती रही हैं। हालांकि इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

चर्चाओं का बाजार गर्म

चर्चाओं में एक दूसरा पहलू भी अब चर्चा का विषय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों का कहना है कि निजी प्रैक्टिस को लेकर यह पहला मामला नहीं है। विभाग के भीतर लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि कुछ अन्य चिकित्सक भी नियमों के विपरीत निजी अस्पतालों, क्लीनिकों अथवा नर्सिंग होम से जुड़े हुए हैं। ऐसे में प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या जांच का दायरा बढ़ाकर अन्य चिकित्सकों की गतिविधियों की भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष और व्यापक जांच कराता है तो कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं कार्रवाई के बाद कई चिकित्सकों में बेचैनी बढ़ गई है और विभागीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।

पूरे मामलों पर क्या बोले जिलाधिकारी

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले एक कर्मचारी को गोपनीय जांच के लिए भेजा गया था। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद संयुक्त टीम को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि अभी पूरी जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों के अनुरूप विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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