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डॉक्टर के बिना ओटी में क्यों गई नर्गिस? मौत के बाद अस्पताल पर लापरवाही के आरोप

कुशीनगर। पित्त की थैली में पथरी के ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराई गई नर्गिस व की मौत के बाद कुशीनगर के कसया स्थित लूना अस्पताल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के पति तसलीम ने पुलिस अधीक्षक को दिए गये शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जिस सर्जन के आने का इंतजार कराया जा रहा था, उसके पहुंचने से पहले ही मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। कुछ देर बाद हालत गंभीर होने की बात कहकर दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने कथित तौर पर महिला को मृत घोषित कर दिया। शिकायत में लगाए गए आरोपों ने उपचार प्रक्रिया, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और मौत के वास्तविक कारणों को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बेशक! कसया स्थित लूना अस्पताल में बीते दिनो हास्पिटल की लापरवाही के कारण नर्गिस खातून की हुई मौत का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। नगर पालिका परिषद कसया के वार्ड नंबर-4 अम्बेडकर नगर (भरौली) निवासी तसनीम कौसर द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि जिस समय ऑपरेशन होना था, उस समय सर्जन अस्पताल पहुंचे ही नहीं थे, जबकि मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले जाकर इलाज शुरू कर दिया गया। तसनीम के मुताबिक पत्नी नर्गिस खातून को एक जून को पित्त की थैली में पथरी के ऑपरेशन के लिए लूना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल कर्मियों ने पहले बताया कि ऑपरेशन अगले दिन होगा और डॉक्टर गोरखपुर से आ रहे हैं।शिकायत के अनुसार 2 जून की सुबह करीब साढ़े आठ बजे अस्पताल के कर्मचारी और ओटी स्टाफ मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले गए। परिजनों का आरोप है कि उस समय तक सर्जन अस्पताल नहीं पहुंचे थे। करीब आधे घंटे बाद परिवार को बताया गया कि मरीज की हालत गंभीर है और उसे दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ेगा।परिजनों का आरोप है कि इसके बाद आनन-फानन में एम्बुलेंस बुलाकर मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि महिला की मौत पहले ही हो चुकी है। शिकायतकर्ता का दावा है कि बाद में मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में भी यही बात कही गई।

मौत के बाद अस्पताल से गायब मिले जिम्मेदार?

शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब परिजन मृतका को लेकर दोबारा लूना अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल संचालक रिजवान, चिकित्सक और ओटी प्रभारी वहां मौजूद नहीं मिले। इतना ही नहीं, परिजनों को उपचार से जुड़े दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया। परिवार का आरोप है कि बिना सर्जन की मौजूदगी के मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले जाना और इलाज करना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में हास्पिटल संचालक रिजवान, चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

जांच में छिपा है सबसे बड़ा सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं तो ऑपरेशन थियेटर में आखिर क्या हुआ? मरीज की हालत अचानक क्यों बिगड़ी? उसे रेफर करने का निर्णय किस परिस्थिति में लिया गया? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया?फिलहाल मृतक के पति ने जिले के तेज-तर्रार ईमानदार छवि वाले पुलिस अधीक्षक केशव कुमार को शिकायत पत्र सौंप दी है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि पीडित को न्याय मिलने से कसया थाना रोक नही पायेगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसियां अस्पताल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी चार्ट और मेडिकल दस्तावेजों की जांच कर सच्चाई तक पहुंच पाती हैं या नहीं।इधर, नर्गिस की मौत के बाद उठे सवालों ने पूरे क्षेत्र में निजी अस्पतालों की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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