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झारखंड में DGP की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला गरमा गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं न्यायमित्र (Amicus Curiae) राजू रामचंद्रन ने अदालत को दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि तदाशा मिश्रा की DGP के रूप में नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं थी। मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को DGP नियुक्त किया गया था, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगले ही दिन थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि DGP पद के लिए चयनित अधिकारी की सामान्य सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने की सेवा शेष होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में पुलिस सुधारों और DGP नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए थे।
इस मामले में झारखंड सरकार ने अपने हलफनामे में नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा है कि प्रक्रिया राज्य में लागू नियमों और चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। अब इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 7 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई होनी है।
