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विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र का बड़ा कदम, नियमों में दी गई ढील

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प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में विदेशी निवेश से जुड़ी नीति में अहम बदलाव को मंजूरी दी गई है। इस फैसले के तहत फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) से संबंधित नियमों में कुछ ढील दी गई है, खासकर उन देशों के निवेश के मामले में जो भारत के साथ भूमि सीमा साझा करते हैं। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से निवेश प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी और देश में स्टार्टअप तथा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी।

2020 में लागू हुआ था सख्त नियम

कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2020 में केंद्र सरकार ने Press Note-3 जारी किया था। इसके तहत भारत से सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले किसी भी निवेश को सरकारी मंजूरी के रास्ते (Government Route) से गुजरना अनिवार्य कर दिया गया था। इस नियम का उद्देश्य उस समय भारतीय कंपनियों को सस्ते अधिग्रहण से बचाना था। यह प्रावधान मुख्य रूप से चीन सहित अन्य पड़ोसी देशों के निवेश पर लागू था।

नए बदलाव में क्या प्रावधान

कैबिनेट के ताजा निर्णय के बाद नीति में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। Beneficial Owner यानी वास्तविक लाभार्थी की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है। यदि किसी निवेशक में सीमा साझा करने वाले देश की 10% तक गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी है, तो ऐसे निवेश को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी जा सकती है। निवेश प्राप्त करने वाली भारतीय कंपनियों को संबंधित विवरण सरकार को देना होगा।यह बदलाव Prevention of Money Laundering Rules, 2005 के अनुरूप किया गया है।

 कुछ क्षेत्रों में फास्ट-ट्रैक मंजूरी

सरकार ने कुछ रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए तेज मंजूरी प्रक्रिया भी तय की है।

  • इन क्षेत्रों में शामिल हैं:
  • इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स
  • इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स
  • कैपिटल गुड्स
  • सोलर वैल्यू चेन से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे पॉलीसिलिकॉन और वेफर

इन सेक्टरों में आने वाले निवेश प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर फैसला लेने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कंपनी का बहुमत नियंत्रण भारतीय नागरिकों या संस्थाओं के पास रहे।

निवेश और टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि पहले की व्यवस्था के कारण कई अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंड भारत में निवेश करने से हिचक रहे थे, क्योंकि उनके फंड में विभिन्न देशों के निवेशक शामिल होते हैं।

नई नीति के बाद:

  • निवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी
  • स्टार्टअप और डीप-टेक सेक्टर को नई पूंजी मिल सकेगी
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को मजबूती मिलेगी
  • वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ सकती है

सरकार का कहना है कि आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी सतर्कता बरकरार रखी जाएगी।

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