लोकायुक्त न्यूज़
भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अब सोना लगातार नरमी दिखा रहा है। ताजा कारोबारी सत्र में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच सतर्कता बढ़ी है।
(Gold Price Crash)
मंगलवार को Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोना 0.61% की कमजोरी के साथ ₹1,54,937 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला सोना अब अपने उच्चतम स्तर से करीब 13.50% यानी लगभग ₹24,500 तक फिसल चुका है।
गिरावट के पीछे वैश्विक संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में हालिया गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारकों की बड़ी भूमिका है।
डॉलर में मजबूती: वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की वापसी और मजबूती से सोने की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) वाली मांग कमजोर हुई है।
रूस का रुख: बाजार में चर्चा है कि रूस डॉलर में व्यापार की संभावनाओं पर पुनर्विचार कर रहा है, जिससे गोल्ड-बेस्ड ट्रेड को लेकर बनी धारणा को झटका लगा है।
ब्रिक्स रणनीति पर असर: BRICS देशों द्वारा वैकल्पिक ट्रेड मैकेनिज्म की दिशा में प्रयासों के बीच डॉलर की प्रासंगिकता बढ़ने की खबरों ने निवेश धारणा को प्रभावित किया है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का प्रभाव
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, 2020–2024 के दौरान वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में तेज उछाल के पीछे केंद्रीय बैंकों, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आक्रामक खरीदारी एक प्रमुख कारण रही। इससे मांग-आपूर्ति संतुलन पर असर पड़ा और कीमतों को ऊंचा समर्थन मिला।
आगे की दिशा पर मतभेद
सोने की भविष्य की चाल को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पहले डिजिटल और पेपर गोल्ड में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर भौतिक सोने पर दिखेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें $3,000 प्रति औंस तक फिसलने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय बाजार में भी बड़ी गिरावट की संभावनाओं पर चर्चा है, हालांकि यह पूरी तरह वैश्विक संकेतों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगा।
‘डेड कैट बाउंस’ की चेतावनी
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि बीच-बीच में छोटी तेजी दिखती है तो उसे स्थायी ट्रेंड मानने से बचना चाहिए। कई विश्लेषक ऐसी उछाल को ‘डेड कैट बाउंस’ बताते हैं, यानी अस्थायी रिकवरी जो बड़े ट्रेंड को नहीं बदलती। फिलहाल, सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक आर्थिक संकेतकों, डॉलर इंडेक्स और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखें।
