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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की है। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि IAS और IPS अधिकारियों की निष्ठा राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति नहीं, बल्कि संविधान के प्रति होनी चाहिए।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने अधिकारियों को याद दिलाया कि उन्हें नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों, गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शक्तियां दी गई हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि नौकरशाही और पुलिस अपने अधिकारों का मनमाने ढंग से इस्तेमाल करती रही तो उत्तर प्रदेश “Orwellian Dystopia” यानी दमनकारी और तानाशाही जैसी व्यवस्था में बदल सकता है।
मामला नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें आकृति चौधरी पर NSA लगाया गया था। हाईकोर्ट ने हिरासत आदेश को रद्द करते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन माना। कोर्ट ने आकृति को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश भी दिया, जिसकी वसूली जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से करने को कहा गया।
कोर्ट की यह टिप्पणी प्रशासनिक जवाबदेही, नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक शासन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
