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राजधानी दिल्ली में देर रात बड़ा हादसा! सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई और अंदर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में 7 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। भारी मलबे को हटाने के लिए मशीनों की मदद ली गई। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले की जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। PG मालिक को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। वहीं, कथित लापरवाही के आरोप में नगर निगम के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी में जर्जर और असुरक्षित इमारतों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर इमारत पहले से कमजोर थी, तो समय रहते इसकी जांच क्यों नहीं की गई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की?
एक इमारत का गिरना सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल है।
सवाल बड़ा है—जर्जर इमारतों की समय पर जांच क्यों नहीं हुई?
