लोकायुक्त NEWS
कुशीनगर। नगर पंचायत दुदही में विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य वित्त वर्ष 2025-26 के तहत सीवरेज एवं जलनिकास व्यवस्था से संबंधित ई-टेंडर को निर्धारित समय पर न खोले जाने को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले को लेकर नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म है और समाजसेवी मनोज कुंदन ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत दुदही के विभिन्न वार्डों में जलनिकास व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 4 दिसंबर 2025 को ई-टेंडर आमंत्रित किया गया था। टेंडर भरने एवं खोलने की अंतिम तिथि 24 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई थी। इस परियोजना पर लगभग 1 करोड़ 51 लाख रुपये खर्च कर नगर की प्रमुख नालियों का नेटवर्क स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष बरसात के दौरान नगर पंचायत क्षेत्र में गंभीर जलभराव की समस्या सामने आई थी, जिसके समाधान के लिए यह कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरोप है कि निर्धारित तिथि बीत जाने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिससे बरसात से पूर्व कार्य पूर्ण होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। नगर में यह चर्चा भी है कि अध्यक्ष प्रतिनिधि के चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर प्रक्रिया में विलंब किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस टेंडर में बाहरी एवं स्वतंत्र ठेकेदारों ने भी भाग लिया है और उनकी ओर से अपेक्षाकृत कम दरों पर निविदाएं भरी गई हैं, जिससे कथित रूप से कुछ ठेकेदारों को कार्य मिलने की संभावना कम हो गई है। कुछ स्वतंत्र ठेकेदारों का आरोप है कि टेंडर नहीं खोलकर अपने लोगों को पिछले दरवाजे से लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, नगर में यह भी चर्चा है कि कई कार्य फर्जी फर्मों के नाम पर कराए जाने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। इसकी सच्चाई तो जांच का विषय बना हुआ है, जांच बाद ही सच्चाई का खुलासा हो पायेगा। ई-टेंडर दस्तावेज के अनुसार इस कार्य को तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन अभी तक टेंडर प्रक्रिया लंबित रहने से बरसात से पहले जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त होना कठिन माना जा रहा है।
समाजसेवी एवं टीम अटल के संयोजक मनोज कुंदन ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की है कि पिछले वर्ष से अब तक हुए सभी ई-टेंडरों की जांच कराई जाए तथा कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, जिससे संभावित अनियमितताओं का खुलासा हो सके।

