संतकबीरनगर। जनपद में सोमवार भोर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पत्रकारिता जगत को गहरे शोक में डुबो दिया। खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के रसूलाबाद के पास हाईवे पर डीसीएम और वैगनआर कार की भीषण टक्कर में कुशीनगर जनपद के दो पत्रकारों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
मिली जानकारी के अनुसार गोरखपुर से लखनऊ की ओर जा रही एक डीसीएम ट्रक (MH03DV8752) अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पार कर गई। उसी दौरान लखनऊ से गोरखपुर की ओर जा रही वैगनआर कार (UP53AS4404) से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार चारों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार का चालक सीट पर ही फंस गया था। आसपास मौजूद पेट्रोल पंप कर्मियों और स्थानीय लोगों ने कार का दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल संतकबीरनगर भेजा गया।
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने कार सवार पत्रकार धनंजय पाण्डेय (35 वर्ष) पुत्र उमाकांत पांडेय, निवासी सरगरिया उर्फ रामनगर, जनपद कुशीनगर तथा शंभू मिश्रा (45 वर्ष) पुत्र रमाकांत मिश्रा, निवासी लखुआ खुर्द, जनपद कुशीनगर को मृत घोषित कर दिया। वहीं रमन कुमार (42 वर्ष) पुत्र मुन्नीलाल, निवासी इंदिरा नगर पडरौना और सुदेश मिश्रा (42 वर्ष) पुत्र हंसराज मिश्रा, निवासी चिलोना, जनपद कुशीनगर गंभीर रूप से घायल हैं और उनका उपचार जारी है।
बताया जा रहा है कि कार में सवार सभी लोग हिंदी पत्रकार एसोसिएशन के प्रदेश स्तरीय होली मिलन एवं पत्रकार सम्मान समारोह में शामिल होकर कुशीनगर वापस लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह भीषण हादसा हो गया।
इस दर्दनाक दुर्घटना की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जिला पंचायत अध्यक्ष बलराम यादव अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया और चिकित्सकों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को सांत्वना देते हुए कहा कि इस कठिन समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनके साथ खड़े हैं और हर संभव मदद की जाएगी।
पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
यह हादसा न केवल दो परिवारों के लिए असहनीय क्षति है, बल्कि पत्रकारिता जगत के लिए भी एक गहरी अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।