लोकायुक्त NEWS
उत्तर प्रदेश के जनपद कुशीनगर में पडरौना नगर पालिका के वार्ड नंबर तीन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर से प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। युवा समाजसेवी कुँ. विशाल प्रताप सिंह ने योजना की पात्रता सूची पर सवाल खड़े करते हुए इसे भ्रष्टाचार और मनमानी का खुला उदाहरण बताया है।
विशाल प्रताप सिंह का आरोप है कि वार्ड नंबर तीन में जिन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया है, उनमें अधिकांश लोग अपात्र हैं। सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं जो पहले से पक्के मकान के मालिक हैं। यही नहीं, कुछ लाभार्थी ऐसे भी बताए जा रहे हैं जो सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जो कि योजना की मूल शर्तों के बिल्कुल विपरीत है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और बेघर लोगों को छत देना है, लेकिन यहां वास्तविक जरूरतमंदों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया, जबकि रसूखदार और अपात्र लोग सरकारी लाभ ले गए। यह सीधे तौर पर योजना की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
युवा समाजसेवी ने मांग की है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने जांच कर रिपोर्ट तैयार की है, उनकी भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। यदि जांच निष्पक्ष होती, तो ऐसे अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल ही नहीं होते। इससे यह संदेह और गहरा होता है कि कहीं न कहीं मिलीभगत और भ्रष्टाचार हुआ है।
मामला सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन कटघरे में खड़ा है। स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश है और वे उच्चस्तरीय जांच तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना को यूं ही भ्रष्टाचार का जरिया बना रहने दिया जाएगा।
