
लोकायुक्त NEWS
Allahabad High Court ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि निजी परिसर में पढ़ी जा रही नमाज में किसी भी तरह की दखलअंदाजी न की जाए। अदालत ने कहा कि यदि किसी निजी संपत्ति पर बनी मस्जिद में धार्मिक प्रार्थना हो रही है, तो उसे रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
यह आदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें Shekhar B. Saraf और Vivek Chaudhary शामिल थे, ने सुनाया। कोर्ट में यह याचिका बदायूं निवासी अलीशेर ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि प्रशासन उन्हें और अन्य मुस्लिम समुदाय के लोगों को उनकी निजी जमीन के एक हिस्से पर बनी ‘वक्फ मस्जिद रजा’ में शांति से नमाज पढ़ने से न रोके।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि निजी परिसर में होने वाली धार्मिक प्रार्थना पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने उसी फैसले से सहमति जताते हुए अधिकारियों को अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने का निर्देश दिया।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सार्वजनिक सड़क या सार्वजनिक संपत्ति पर नमाज या किसी धार्मिक गतिविधि के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बनती है, तो पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकती है। कोर्ट ने 25 फरवरी को इस याचिका का निपटारा करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
