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“छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर टिप्पणी को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना की”

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LOKAYUKT NEWS

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बारे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कथित टिप्पणी की बुधवार को आलोचना की और उनसे राष्ट्रपति व देश से माफी मांगने को कहा। बनर्जी को मंगलवार को लिखे एक पत्र में साय ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और आपसी सम्मान की संस्कृति की हमेशा सराहना की गई है और इसे बनाए रखा जाना चाहिए। साय ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस पत्र की प्रति भी साझा की जिसमें लिखा, ”आपको दूसरी बार बड़े ही दुखी मन से यह पत्र लिख रहा हूं। आशा है कि आप संज्ञान लेंगी। 

भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं और शिष्टाचार हमेशा से प्रशंसित रहे हैं। यहां मतभेद को कभी भी मनभेद नहीं बनाया गया। हमें इसे अक्षुण्ण रखना चाहिए।” पत्र में लिखा, ”जनजातीय समाज से आने वाली भारत की महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ पिछले दिनों आपके द्वारा किया गया अपमान इन परंपराओं को तिलांजलि देने जैसा प्रतीत हुआ है जिससे मुझे दुख हुआ है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले किया गया यह व्यवहार अक्षम्य है। विशेषकर आप स्वयं महिला हैं और इसके बावजूद ऐसा किया जाना अत्यंत पीड़ादायक है।” 

साय ने लिखा, ”हमें अब तक लगा था कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हुई ऐसी दुखद घटना पर आप खेद व्यक्त करेंगी, लेकिन उस घटना के बाद आपकी प्रतिक्रिया ने देश को और अधिक आहत किया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य सरकार के विरुद्ध राष्ट्रपतिजी को अपनी व्यथा सार्वजनिक करनी पड़ी है, जो अत्यंत कष्टदायक है। पश्चिम बंगाल, जिसके ‘भद्रलोक’ की चर्चा विश्व भर में होती है, उसकी छवि को भी इससे नुकसान पहुंचा है।” उन्होंने कहा, ”अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन नहीं किया गया।

जनजातीय समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम का स्थान मनमाने ढंग से बदल दिया गया और राष्ट्रपतिजी को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा गया।” मुख्यमंत्री ने कहा, ”आपने संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का उल्लंघन किया है और यह अपमान निंदनीय है। यह देश भर के मेरे जैसे करोड़ों आदिवासियों, पिछड़ों और दलितों का अपमान है। मातृशक्ति का भी अपमान किया गया है।” मुख्यमंत्री ने पत्र में संदेशखलि की घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा, ”हमने पहले भी संदेशखलि कांड पर आपका ध्यान आकर्षित किया था, जहां जनजातीय समाज की महिलाओं के खिलाफ आपकी पार्टी के नेताओं ने गंभीर अपराध किए थे। तब भी आपने इस मुद्दे पर बात नहीं कर अपनी आदिवासी-वंचित विरोधी मानसिकता का परिचय दिया था।

उन्होंने सवाल किया, ”आखिर जनजातीय समाज ने आपका क्या बिगाड़ा है?” साय ने पत्र में लिखा, ”पश्चिम बंगाल के संथाल समाज सहित सभी निवासियों की राज्य के विकास में भागीदारी रही है। वंचित समाज के साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जाना पूरी तरह अनुचित है और प्रदेश की जनता इसे नहीं भूलेगी।” उन्होंने लिखा, ”आपसे आग्रह है कि कृपया सच्चे मन से देश, समाज और राष्ट्रपतिजी से क्षमा मांगकर अपनी भूल स्वीकार करें और आगे से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार का आश्वासन दें। ऐसा करना आपकी निजी छवि को सुधारने की दृष्टि से भी उपयोगी रहेगा।

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