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कोतवाली पुलिस पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप, पीड़ित ने डीएम-एसपी से की निष्पक्ष जांच की मांग

संतकबीरनगर। जिले की खलीलाबाद कोतवाली पुलिस पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने और मारपीट करने के आरोप का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और मामला पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के डीहा निवासी मनीष कुमार पुत्र कौशल किशोर ने प्रशासन को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 4 मार्च 2026 को उसके बड़े भाई विवेकानंद, जो स्वयं को खलीलाबाद टाइम्स का संपादक बताते हैं, किसी समाचार के सिलसिले में कोतवाली पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कोतवाली में तैनात एसएसआई प्रमोद कुमार यादव से हुई।
पीड़ित के अनुसार बातचीत के दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, जिसके बाद आरोप है कि एसएसआई और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से मारपीट शुरू कर दी। मामले को लेकर जब मनीष कुमार अपने परिजनों के साथ शिकायत करने कोतवाली पहुंचे तो वहां भी उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने उनका मोबाइल फोन और न्यूज माइक्रोफोन जब्त कर लिया तथा चार लोगों को पकड़कर शांतिभंग की आशंका में चालान कर दिया। इसके बाद उनके विरुद्ध मुकदमा संख्या 0138/2026 दर्ज कर दिया गया, जिसे पीड़ित ने पूरी तरह फर्जी बताया है।
पीड़ित का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई पुलिस की मनमानी और तानाशाही को दर्शाती है। उसने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा एसएसआई प्रमोद कुमार यादव, फ्लावर गुप्ता सहित अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में सामान्यतः प्रशासन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच कराता है, जिसके बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाती है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और विधिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो शिकायतकर्ता के विरुद्ध भी कार्रवाई संभव है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई हैं।
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